भारत का वह जिला, जहां है देश का पहला और दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप
भारत में आपने अलग-अलग जिलों के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला नदी-द्वीप कहां है और कौन-सा है, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग जिले हैं, जिनकी अपनी-अपनी विशेषता है। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जहां देश का पहला और दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप है। इसे सरकार द्वारा औपचारिक रूप से भारत का पहला नदी-द्वीप जिला घोषित भी किया गया था। कौन-सा है यह जिला और कौन-सा है नदी-द्वीप, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
भारत का पहला नदी-द्वीप
भारत का पहला और दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप जिला माजुलीहै, जो पूर्वोत्तर राज्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी के बीचो-बीच स्थित है। सितंबर 2016 में असम सरकार ने इसे औपचारिक रूप से भारत का पहला 'नदी-द्वीप जिला' घोषित किया था। इससे पहले यह जोरहाट जिले का एक सब-डिवीजन हुआ करता था।
माजुली है असम की सांस्कृतिक राजधानी
माजुली को असम की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। 15वीं-16वीं शताब्दी में महान संत, समाज सुधारक और विद्वान श्रीमंत शंकरदेव और उनके शिष्य माधवदेव ने यहां नव-वैष्णव भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी। माजुली में कई ऐतिहासिक वैष्णव मठ स्थित हैं, जो केवल धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि नृत्य, संगीत, नाटक और कला के म्यूजियम कहे जाते हैं। इनमें आउनीआटी, कमलाबाड़ी और शमागुरी यहां के प्रसिद्ध सेशन हैं।
नदी-द्वीप की मुखौटा कला
शमागुरी सत्र अपने पारंपरिक हाथ से बने मुखौटों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इन मुखौटों का उपयोग यहां के पारंपरिक धार्मिक नाटक 'भाओना' के मंचन में किया जाता है।
जैव-विविधता और प्राकृतिक सुंदरता
माजुली केवल एक प्रशासनिक जिला नहीं है, बल्कि यहां एक बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यहां कई मौसमी वेटलैंड्स हैं, जहां सर्दियों के दौरान साइबेरिया और अन्य ठंडे देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। माजुली की मिट्टी अधिक उपजाऊ है। यहां बिना रासायनिक खाद के सैकड़ों किस्मों के चावल की खेती होती है, जिनमें प्रसिद्ध 'कोबा चावल' और 'लाल चावल' शामिल हैं।
माजुली का सिकुड़ता क्षेत्रफल
अपनी इन सभी विशेषताओं के बावजूद माजुली एक गंभीर भौगोलिक संकट का सामना कर रहा है। मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में आने वाली बाढ़ और नदी-तट के लगातार कटाव के कारण इसका क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है। 20वीं सदी की शुरुआत में इसका क्षेत्रफल लगभग 1,250 वर्ग किलोमीटर था, जो अब घटकर 400 वर्ग किलोमीटर से भी कम रह गया है।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.