IIM बोधगया निदेशक प्रो.विनीता एस.सहाय की सलाह: AI के दौर में माइंडफुलनेस क्यों है जरूरी?
आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनीता एस. सहाय ने एआई के दौर में युवाओं के लिए माइंडफुलनेस और संतुलित नेतृत्व के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और निरंतर सीखने की मानसिकता भविष्य के सफल नेताओं के लिए आवश्यक है।
आज का युवा ऐसे दौर में अपना भविष्य बना रहा है, जब दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के बीच खड़ी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आटोमेशन, डाटा साइंस पूरी दुनिया पर दबदबा बना रहे हैं। इन हालातों में युवाओं के कंधों पर नई तकनीक के साथ ताल मिलाकर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में माइंडफुलनेस होकर संतुलित नेतृत्व की ओर कैसे आगे बढ़ा जाए, बता रही हैं आइआइएम बोधगया की निदेशक...
कैसे रहें माइंडफुल
आज की तेज रफ्तार दुनिया में युवाओं पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है। हर समय आनलाइन रहने की संस्कृति, सोशल मीडिया पर तुलना, करियर की अनिश्चितता और तेजी से बदलती अपेक्षाएं कई युवाओं को मानसिक रूप से थका रही हैं। ऐसे समय में मानसिक संतुलन और भावनात्मक दृढ़ता भी आवश्यक हो गई है। यहीं “माइंडफुलनेस” की भूमिका महत्वपूर्ण बनती है।
माइंडफुलनेस केवल ध्यान या आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि स्वयं को समझने, परिस्थितियों में संतुलित बने रहने और दबाव के बीच स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता है। आज संस्थानों और उद्योगों को ऐसे युवा चाहिए जो केवल तेजी से प्रतिक्रिया न दें, बल्कि सोच-समझकर निर्णय ले सकें, टीम को भरोसा दे सकें और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी दिशा न खोएं। भविष्य में सबसे प्रभावी नेतृत्व उन्हीं लोगों के हाथों में होगा, जो तकनीक की गति के साथ मन की स्थिरता और मानवीय संवेदनशीलता को भी बनाए रख सकें।
आज युवाओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि “कौन सी नौकरी मिलेगी?”, बल्कि यह है कि “क्या मैं भविष्य की बदलती दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार हूं?”
यह समय केवल करियर बनाने का नहीं, बल्कि ऐसे भारत के निर्माण का है जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और सजग नेतृत्व से भी समृद्ध हो।
भारत का उत्तरदायित्व निभाएंगे युवा
भारत की सबसे बड़ी शक्ति है युवा। आने वाले वर्षों में भारत की दिशा इस बात से तय होगी कि आज का युवा स्वयं को किस प्रकार से तैयार करता है। क्या वे केवल नौकरी पाने के लिए उत्सुक हैं या फिर अपने व्यक्तित्व का विकास करते हैं। नई तकनीक सीखें, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता को कभी कमजोर न होने दें। प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन अपनी नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को न भूलें। तेजी से आगे बढ़ें, लेकिन अपने भीतर स्थिरता और उद्देश्य भी बनाए रखें।
आज दुनिया में ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो कठिन समय में निर्णय ले सकें, समाज को दिशा दे सकें और तकनीक को मानवता के हित में उपयोग कर सकें। याद रखिए, भविष्य केवल उन्हीं का नहीं होगा जो मशीनों के साथ काम करना जानते हैं, बल्कि उनका होगा जो मनुष्यों को साथ लेकर आगे बढ़ना जानते हैं। एआइ दुनिया को बदल सकता है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी युवा ही करेंगे।
एआइ सब कुछ नहीं कर सकता
एआइ आज कुछ ही सेकेंड में बड़ी मात्रा में डाटा विश्लेषण, रिपोर्ट तैयार, भाषा का अनुवाद और जटिल प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है। उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्त जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसी क्षमताएं हैं, जो अब भी केवल मनुष्य को विशिष्ट बनाती हैं।
जब किसी टीम में संकट उत्पन्न होता है, समाज कठिन परिस्थितियों का सामना करता है, या जब किसी निर्णय का प्रभाव लोगों के जीवन पर पड़ता है, तब केवल जानकारी पर्याप्त नहीं होती। वहां विवेक, विश्वास निर्माण और मानवीय समझ की आवश्यकता होती है। मशीनें सूचना दे सकती हैं, लेकिन सहानुभूति, जिम्मेदारी और नेतृत्व का स्थान नहीं ले सकतीं। आने वाले समय में सबसे अधिक प्रभावी वही लोग होंगे जो तकनीक का उपयोग केवल दक्षता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि समाज और मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए करना सीखेंगे।
सफलता का बदलता समीकरण
लंबे समय तक यह धारणा रही कि अच्छी डिग्री, तकनीकी ज्ञान और उच्च अंक सफलता की गारंटी हैं। निस्संदेह शिक्षा और तकनीकी दक्षता आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब सफलता का समीकरण बदल रहा है। आज संस्थानों और उद्योगों को केवल विशेषज्ञ नहीं, बल्कि ऐसे पेशेवर चाहिए जो बदलती परिस्थितियों में सीख सकें, निर्णय ले सकें और नए समाधान विकसित कर सकें। इसलिए आज युवाओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ संवाद कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास भी उतना ही आवश्यक हो गया है।
भविष्य के लिए खुद को कैसे तैयार करें?
बदलती दुनिया में सीखना अब एक निरंतर प्रक्रिया बन चुका है। किसी एक डिग्री या प्रमाणपत्र के आधार पर करियर की नींव नहीं रखी जाएगी। युवाओं को सीखते रहने की मानसिकता विकसित करनी होगी। उन्हें अपने भीतर कुछ महत्वपूर्ण आदतें विकसित करनी होंगी। पहला, हर वर्ष कुछ नया सीखने की तैयारी। दूसरा, असफलताओं को अंत नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया मानना। तीसरा, अलग-अलग विषयों और लोगों से सीखने की खुली मानसिकता रखना।
बातचीत - सुमन अग्रवाल
Priyaish Srivastava is Community Manager at Jagran Josh and holds a postgraduate degree in Mass Communication. With over six years of experience in creative writing, AV content creation, social media marketing, and community management, he specialises in building engaging digital communities and developing impactful content strategies in the education and media sectors. He can be reached at priyaish.srivastava@jagrannewmedia.com.